रूढ़िवाद (Conservatism) का अर्थ
रूढ़िवाद एक प्रकार की राजनीतिक विचारधारा है। जो पुराने समय से चले आ रहे सिद्धांतों और तत्त्वों मे विश्वास करती है और उसी को अपनाती है।
रूढ़िवाद परिवर्तन को स्वीकार नहीं करता है। वह पहले से बनी परंपरा पर ही विश्वास करता है। क्योंकि रूढ़िवादी विचारकों का मानना है कि हमारे पूर्वजों ने जो कायदे, कानून, नियम बनाए हैं वे बहुत सोच समझ कर बनाए हैं इसलिए हमें उन्हें ही अपनाना चाहिए।
रूढ़िवाद परिवर्तन को स्वीकार नहीं करता है। वह पहले से बनी परंपरा पर ही विश्वास करता है। क्योंकि रूढ़िवादी विचारकों का मानना है कि हमारे पूर्वजों ने जो कायदे, कानून, नियम बनाए हैं वे बहुत सोच समझ कर बनाए हैं इसलिए हमें उन्हें ही अपनाना चाहिए।
रूढ़िवाद (Conservatism) का उदय
18 वीं शताब्दी के अंत और 19वीं शताब्दी के आरंभ में औद्योगिक क्रांति के कारण बहुत सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन हुए और नए-नए अविष्कार किए गए। इन परिवर्तनों और आविष्कारों के कारण पुरानी परंपराओं में बदलाव आने शुरू हुए जिसके कारण अंतः रूढ़िवादी विचारधारा का उदय हुआ।
रूढ़िवादियों ने इन परिवर्तनों और आविष्कारों की आलोचना करी और पुरानी परंपराओं को अपनाने पर जोर दिया।
रूढ़िवाद (Conservatism) की मान्यताएँ / मूल सिद्धांत / प्रासंगिकता / महत्त्व / विशेषताएं
1. परंपराओं पर जोर देना:- रूढ़िवादियों के अनुसार कोई भी समाज सर्वगुण संपन्न नहीं है इसलिए आधुनिक सभी नियम सही नहीं हो सकते हैं अंतः यह पुरानी परंपराओं को अपने पर जोर देते हैं
2. परिवर्तन का विरोध:- रूढ़िवादी विचारकों के अनुसार किसी भी प्रकार के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन मानव जाति के लिए सही नहीं होते हैं
3. यथार्थवादी:- रूढ़िवादी विचारक आदर्श समाज की कल्पना नहीं करते हैं बल्कि यथार्थ स्थिति (वास्तविकता) को स्वीकार करते हैं
रूढ़िवादी विचारक क्या होना चाहिए की जगह क्या हो रहा है पर विश्वास करते हैं
4. परिवार, धर्म और समुदाय का महत्व:- रूढ़िवादी आम तौर पर परिवार, धर्म और समुदाय को महत्व देते हैं, और अक्सर इन संस्थानों को कमजोर करने वाले सामाजिक परिवर्तनों के आलोचक होते हैं।
5. व्यापक योजना का विरोध:- रूढ़िवादी विचारक समाज में हो रहे छोटे बदलाव को समाज के लिए खतरा नहीं मानते हैं बल्कि बड़े बदलाव को समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा मानते हैं
6. मुक्त-बाज़ार और पूंजीवाद का समर्थन:- रूढ़िवाद एक मुक्त-बाज़ार अर्थव्यवस्था और अर्थव्यवस्था में सीमित सरकारी हस्तक्षेप का समर्थन करते हैं, उनका मानना है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मुक्त व्यवसाय आर्थिक समृद्धि की कुंजी हैं।
7. आत्मनिर्भरता पर जोर:- रूढ़िवादी व्यक्तिगत जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हैं, उनका मानना है कि लोगों को अपने कल्याण के लिए जिम्मेदार होना चाहिए और समर्थन के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
8. क्रांतिविहीन समाज:- रूढ़िवादी विचारक क्रांतिवीन समाज की गणना करना चाहते हैं क्योंकि समाज में हो रहे परिवर्तनों का मुख्य कारण क्रांति ही है
इसलिए रूढ़िवादी विचारक एक शांतिपूर्ण समाज के लिए क्रांति को स्वीकार नहीं करते हैं
9. परिवर्तनकारी समझौते का विरोध:- रूढ़िवादी विचारक उन समझौते का भी विरोध करते हैं जिससे समाज में बदलाव होते हैं
10. तर्कवाद का विरोध:- रूढ़िवादी विचारक उन सभी चीजों का विरोध करते हैं जहां तर्क या बुद्धि का उपयोग होता है क्योंकि उनका मानना है कि बदलाव के मुख्य जड़ तर्क या बुद्धि ही है
2. परिवर्तन का विरोध:- रूढ़िवादी विचारकों के अनुसार किसी भी प्रकार के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन मानव जाति के लिए सही नहीं होते हैं
3. यथार्थवादी:- रूढ़िवादी विचारक आदर्श समाज की कल्पना नहीं करते हैं बल्कि यथार्थ स्थिति (वास्तविकता) को स्वीकार करते हैं
रूढ़िवादी विचारक क्या होना चाहिए की जगह क्या हो रहा है पर विश्वास करते हैं
4. परिवार, धर्म और समुदाय का महत्व:- रूढ़िवादी आम तौर पर परिवार, धर्म और समुदाय को महत्व देते हैं, और अक्सर इन संस्थानों को कमजोर करने वाले सामाजिक परिवर्तनों के आलोचक होते हैं।
5. व्यापक योजना का विरोध:- रूढ़िवादी विचारक समाज में हो रहे छोटे बदलाव को समाज के लिए खतरा नहीं मानते हैं बल्कि बड़े बदलाव को समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा मानते हैं
6. मुक्त-बाज़ार और पूंजीवाद का समर्थन:- रूढ़िवाद एक मुक्त-बाज़ार अर्थव्यवस्था और अर्थव्यवस्था में सीमित सरकारी हस्तक्षेप का समर्थन करते हैं, उनका मानना है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मुक्त व्यवसाय आर्थिक समृद्धि की कुंजी हैं।
7. आत्मनिर्भरता पर जोर:- रूढ़िवादी व्यक्तिगत जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हैं, उनका मानना है कि लोगों को अपने कल्याण के लिए जिम्मेदार होना चाहिए और समर्थन के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
8. क्रांतिविहीन समाज:- रूढ़िवादी विचारक क्रांतिवीन समाज की गणना करना चाहते हैं क्योंकि समाज में हो रहे परिवर्तनों का मुख्य कारण क्रांति ही है
इसलिए रूढ़िवादी विचारक एक शांतिपूर्ण समाज के लिए क्रांति को स्वीकार नहीं करते हैं
9. परिवर्तनकारी समझौते का विरोध:- रूढ़िवादी विचारक उन समझौते का भी विरोध करते हैं जिससे समाज में बदलाव होते हैं
10. तर्कवाद का विरोध:- रूढ़िवादी विचारक उन सभी चीजों का विरोध करते हैं जहां तर्क या बुद्धि का उपयोग होता है क्योंकि उनका मानना है कि बदलाव के मुख्य जड़ तर्क या बुद्धि ही है
रूढ़िवाद (Conservatism) के प्रकार या स्वरूप
1. स्वभावगत रूढ़िवाद:- इस प्रकार के व्यक्ति का स्वभाव ही रूढ़िवादी होता है और वह परिवर्तनीय जीवन शैली का विरोध करता है
रॉस्सीटर के अनुसार रूढ़िवाद एक स्वभावगत और मनोवैज्ञानिक स्थित है और एक स्वभावगत रूढ़िवादी मनुष्य के तत्व परंपरा, जड़त्व (जुड़ाव), भय (डर) और स्पर्धा (competition) होते हैं
2. सत्तावादी रूढ़िवाद:- इस प्रकार के रूढ़िवादी व्यक्ति के अनुसार सत्ता उसी समूह या वर्ग के पास होनी चाहिए जैसे वर्ग या समूह के पास सत्ता पहले थी क्योंकि सत्ता का सही प्रयोग करना उस वर्ग से बेहतर कोई और नहीं जा सकता है
3. पितृसत्तात्मक रूढ़िवाद:- इस प्रकार के रूढ़िवादी व्यक्ति के अनुसार पिता की संपत्ति का पूर्ण अधिकार सबसे बड़े पुत्र का ही होना चाहिए और महिलाओं को इसमें शामिल नहीं किया जाता है
4. स्थितिगत रूढ़िवाद:- इस प्रकार का रूढ़िवादी व्यक्ति यथा (पुरानी) स्थिति को बनाए रखने का प्रयास करता है यानी जैसी स्थिति होती है वैसा ही बनाए रखने की कोशिश करते हैं
यह सामाजिक, आर्थिक, कानूनिक, धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का पूर्ण रूप से विरोध करते हैं इसलिए इस प्रकार के रूढ़िवादी व्यक्ति अपनी परंपराओं को बनाए रखने के लिए परिवर्तनों से भय होते हैं
5. राजनीतिक रूढ़िवाद:- इस प्रकार के रूढ़िवादी व्यक्ति उन राजनीतिक दलों और संस्थाओं को मान्यता देते हैं जिन्हें नैतिकता विरासत में मिली हो
यह व्यक्ति दल तथा संस्थाओं द्वारा सुधारात्मक परियोजनाओं का भी विरोध करते हैं और यह भविष्य की अपेक्षा अतीत की अत्यधिक प्रशंसा करते हैं
रॉस्सीटर के अनुसार रूढ़िवाद एक स्वभावगत और मनोवैज्ञानिक स्थित है और एक स्वभावगत रूढ़िवादी मनुष्य के तत्व परंपरा, जड़त्व (जुड़ाव), भय (डर) और स्पर्धा (competition) होते हैं
2. सत्तावादी रूढ़िवाद:- इस प्रकार के रूढ़िवादी व्यक्ति के अनुसार सत्ता उसी समूह या वर्ग के पास होनी चाहिए जैसे वर्ग या समूह के पास सत्ता पहले थी क्योंकि सत्ता का सही प्रयोग करना उस वर्ग से बेहतर कोई और नहीं जा सकता है
3. पितृसत्तात्मक रूढ़िवाद:- इस प्रकार के रूढ़िवादी व्यक्ति के अनुसार पिता की संपत्ति का पूर्ण अधिकार सबसे बड़े पुत्र का ही होना चाहिए और महिलाओं को इसमें शामिल नहीं किया जाता है
4. स्थितिगत रूढ़िवाद:- इस प्रकार का रूढ़िवादी व्यक्ति यथा (पुरानी) स्थिति को बनाए रखने का प्रयास करता है यानी जैसी स्थिति होती है वैसा ही बनाए रखने की कोशिश करते हैं
यह सामाजिक, आर्थिक, कानूनिक, धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का पूर्ण रूप से विरोध करते हैं इसलिए इस प्रकार के रूढ़िवादी व्यक्ति अपनी परंपराओं को बनाए रखने के लिए परिवर्तनों से भय होते हैं
5. राजनीतिक रूढ़िवाद:- इस प्रकार के रूढ़िवादी व्यक्ति उन राजनीतिक दलों और संस्थाओं को मान्यता देते हैं जिन्हें नैतिकता विरासत में मिली हो
यह व्यक्ति दल तथा संस्थाओं द्वारा सुधारात्मक परियोजनाओं का भी विरोध करते हैं और यह भविष्य की अपेक्षा अतीत की अत्यधिक प्रशंसा करते हैं
रूढ़िवाद (Conservatism) की आलोचना या मूल्यांकन
1 आलोचकों का मानना है कि यह विचारधारा आधुनिक युग से तालमेल नहीं खाती है इसलिए ही यह विचारधारा आज तक किसी भी राज्य में नहीं आया है
2 आलोचकों का कहना है कि इस विचारधारा के सिद्धांत सार्थक (सही) सिद्ध नहीं हुए हैं इसलिए इसे अपनाया नहीं जा सकता है
3 आलोचकों का मानना है कि यह विचारधारा केवल काल्पनिक तथ्यों पर आधारित है और वास्तविकता को पूरी तरीके से जानकारी देती है
4 परिवर्तन एक प्राकृतिक नियम है और यह समाज के लिए भी बहुत जरूरी है इसलिए यह रूढ़िवादी सिद्धांत किसी भी समाज के लिए सही सिद्ध नहीं होगा
5 रूढ़िवाद व्यापक योजनाओ और समझौताे का विरोध करते हैं परंतु योजनाएं और समझौते प्रत्येक समाज के लिए सार्थक सिद्ध हुए हैं
6 रूढ़िवादी विचारक तर्कतावाद का विरोध करते हैं जबकि आधुनिक युग में मानवीय समाज का विकास तारतावाद के बिना असंभव है
2 आलोचकों का कहना है कि इस विचारधारा के सिद्धांत सार्थक (सही) सिद्ध नहीं हुए हैं इसलिए इसे अपनाया नहीं जा सकता है
3 आलोचकों का मानना है कि यह विचारधारा केवल काल्पनिक तथ्यों पर आधारित है और वास्तविकता को पूरी तरीके से जानकारी देती है
4 परिवर्तन एक प्राकृतिक नियम है और यह समाज के लिए भी बहुत जरूरी है इसलिए यह रूढ़िवादी सिद्धांत किसी भी समाज के लिए सही सिद्ध नहीं होगा
5 रूढ़िवाद व्यापक योजनाओ और समझौताे का विरोध करते हैं परंतु योजनाएं और समझौते प्रत्येक समाज के लिए सार्थक सिद्ध हुए हैं
6 रूढ़िवादी विचारक तर्कतावाद का विरोध करते हैं जबकि आधुनिक युग में मानवीय समाज का विकास तारतावाद के बिना असंभव है
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1.Describe the conservative approach to political theory.
राजनीति सिद्धांत के रूढ़िवादी उपागम का वर्णन करो।
OR/अथवा
2.Discuss the main bases of the tradition of conservatism?
रूढ़िवाद की परम्परा के मुख्य आधारों पर चर्चा कीजिये?
OR/अथवा
3.Write an essay on the historical and intellectual evolution of conservatism.
रूढ़िवाद के ऐतिहासिक एवं बौद्धिक विकास पर एक निबंध लिखिए।
OR/अथवा
4.What is the basic principle of conservatism?
रूढ़िवाद का मूल सिद्धांत क्या है?
OR/अथवा
5.What is the role of the principles of conservatism in society?
रूढ़िवाद के सिद्धांतों की समाज में क्या भूमिका है?
OR/अथवा
6.What is the contribution of conservatism to the constitutional and social structure?
रूढ़िवाद का संविधानिक और सामाजिक संरचना में क्या योगदान होता है?
OR/अथवा
7.What are the main features of conservatism and its importance?
रूढ़िवाद की प्रमुख विशेषताएँ और इसका महत्त्व क्या है?
राजनीति सिद्धांत के रूढ़िवादी उपागम का वर्णन करो।
OR/अथवा
2.Discuss the main bases of the tradition of conservatism?
रूढ़िवाद की परम्परा के मुख्य आधारों पर चर्चा कीजिये?
OR/अथवा
3.Write an essay on the historical and intellectual evolution of conservatism.
रूढ़िवाद के ऐतिहासिक एवं बौद्धिक विकास पर एक निबंध लिखिए।
OR/अथवा
4.What is the basic principle of conservatism?
रूढ़िवाद का मूल सिद्धांत क्या है?
OR/अथवा
5.What is the role of the principles of conservatism in society?
रूढ़िवाद के सिद्धांतों की समाज में क्या भूमिका है?
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6.What is the contribution of conservatism to the constitutional and social structure?
रूढ़िवाद का संविधानिक और सामाजिक संरचना में क्या योगदान होता है?
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7.What are the main features of conservatism and its importance?
रूढ़िवाद की प्रमुख विशेषताएँ और इसका महत्त्व क्या है?
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