सकारात्मक कार्रवाई / आरक्षण / सुरक्षात्मक भेदभाव
सकारात्मक कार्रवाई का अर्थ होता है कि लोगों को नियुक्ति, पदोन्नति या शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश, इत्यादि प्रदान करते समय किसी पिछड़े हुए समूह को (जैसे कि स्त्रियों, अश्वेत लोगों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों को) विशेष रियायत (Concession) दी जाये।इस नीति का निर्माण उन लोगों के बचाव के लिए है, जो समाज वंचित हैं और जिनको पहले या वर्तमान समय में भेदभाव का सामना करना पड़ा है।
इसका मुख्य उद्देश्य समाज के कमज़ोर वर्गों की सुरक्षा करना है, जिनका सामाजिक तथा ऐतिहासिक रूप से शोषण किया गया है। इन लोगों को शक्तिशाली लोगों से बचाने के लिए उन्हें व्यापक अवसरों द्वारा राष्ट्र की मुख्यधारा में लाने का प्रयास है।
इसके समर्थकों का तर्क है कि ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए यह एक आवश्यक उपकरण है जबकि आलोचक अक्सर इस बात पर चिंता जताते हैं कि क्या यह निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है?
सकारात्मक कार्रवाई की परिकल्पना गणतंत्र की स्थापना के समय की गई थी। यह भारत जैसे देश में न्याय के सिद्धांत को प्रतिपादित करने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा है। अंतः आरक्षण के प्रावधान भारतीय लोकतंत्र की सफलता में से एक हैं, लेकिन इसने कई समस्याओं को भी जन्म दिया है।
निष्पक्षता का सिद्धात
निष्पक्षता के सिद्धान्त को समझने के लिए जॉन रॉल्स के निष्पक्ष न्याय के सिद्धान्त को जानना होगा। जिसको जॉन रॉल्स ने अपनी पुस्तक “ए थ्योरी ऑफ जस्टिस” में दिया है।रॉल्स के अनुसार, न्याय निष्पक्ष प्रक्रिया पर आधारित निष्पक्ष वितरण है। क्योंकि समाज में सभी व्यक्तियों का ज्ञान समान नहीं होता है और न ही वे समान आर्थिक और सामाजिक स्थितियों में रहते हैं। इसलिए सबसे कमजोर व्यक्ति को सबसे ज्यादा लाभ प्राप्त होना चाहिए।
रॉल्स यह महसूस करते हैं कि लाभों का इस प्रकार का वितरण केवल निष्पक्ष ही नहीं है बल्कि यह न्याय के मानकों के अनुसार भी है। और हमे बिना उत्पादन में अपना योगदान दिए, मुफ्त की चीजों का या सेवाओं की आशा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यही न्याय का एक मानक है।.
जॉन रॉल्स के इन्ही निष्पक्ष विचारों को “निष्पक्षता का सिद्धात” कहा जाता है।
सुरक्षात्मक भेदभाव का सिद्धांत निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करता है
ये उदाहरण दिखाते हैं कि सुरक्षात्मक भेदभाव कभी-कभी निष्पक्षता के सिद्धांत को ध्वस्त नहीं करता, बल्कि कई समाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में समर्थन और समानता को बढ़ावा देता है:-1. चिकित्सा में प्राथमिकता: कई बार चिकित्सा में भेदभाव करते हुए जरूरतमंद और संक्रमित लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी समुदाय में एक खतरनाक बीमारी फैली हो और उसके इलाज के लिए उपलब्ध संसाधन सीमित हों, तो उस समय सुरक्षात्मक भेदभाव देखा जा सकता है जहाँ संक्रमित व्यक्ति को अधिक प्राथमिकता दी जाती है।
2. आर्थिक विकास में बढ़त: कई बार समाज में विकास के क्षेत्र में एक विशेष समुदाय को समर्थन दिया जाता है ताकि उस समुदाय के लोग अपनी सुरक्षा और आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकें। यह भेदभाव प्रदान करके उस समुदाय को सम्मानित करता है और उसकी विकास में सहायता करता है।
3. विज्ञान और तकनीक में अधिकारिता: कई बार एक विशेष समुदाय को विज्ञान, तकनीक और उनके अनुसंधान में अधिकारिता मिलती है ताकि वे उन्हें आगे बढ़ा सकें। इससे उनकी सुरक्षा और समृद्धि में मदद मिलती है।
4. सामाजिक अनुसंधान में विशेषज्ञता: कई बार समाज में विशेष समुदाय को सामाजिक अनुसंधान में विशेषज्ञता दी जाती है ताकि वे उस समाज की समस्याओं को ठीक करने में सहायता कर सकें। इससे समाज में समानता और न्याय में सुधार होता है।
5. सामाजिक सुरक्षा की देखभाल: कई बार समाज में असमानता या सामाजिक सुरक्षा की देखभाल के लिए विशेष समुदायों को अधिक ध्यान दिया जाता है। इससे उनकी सुरक्षा और सुरक्षितता में सुधार होती है।
सकारात्मक कार्रवाई की आवश्यकताएं
1. शिक्षा के प्रति समर्थन: शिक्षा को प्रोत्साहित करना और समर्थन देना। इससे लोगों की सोच विकसित होती है और समाज में प्रगति होती है।2. सामाजिक समानता: सभी व्यक्तियों को समानता का अधिकार, सम्मान प्रदान करना और पिछड़े वर्गों की उन्नति करना।
3. रोजगार के अवसर: नौकरी के अवसरों को बढ़ावा देना और उत्तरप्रदेशन्नति के लिए संभावनाएं बढ़ाना। तथा पिछड़े वर्गों के लिये उपयुक्त अवसर प्रदान करने हेतु ताकि वे उन लोगों के साथ प्रतिस्पर्द्धा नहीं कर सके जिनके पास सदियों से संसाधनों की पहुँच उपलब्ध है।
4. योग्यता और कौशल विकास: लोगों को योग्यता और कौशलों का विकास करने के लिए उन्नति के अवसर प्रदान करना।
5. स्वास्थ्य सेवाएं: स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचना और उन्नति करना।
6. तकनीकी उन्नति: तकनीकी उन्नति को प्रोत्साहित करना और नवाचारों को समर्थन देना।
7. ऐतिहासिक अन्याय को दूर करना: देश में पिछड़ी जातियों द्वारा झेले जा रहे ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिये।
सकारात्मक कार्रवाई की समस्याएँ
1. समता का न होना: राज्य के राजनीतिक और सार्वजनिक संस्थानों में आरक्षण से यह सोचा गया था कि अब तक जो लोग उत्पीड़न और अपमान का सामना कर रहे थे अंतः सत्ता और निर्णय-निर्माण में अपनी हिस्सेदारी पाने में सक्षम होंगे। परंतु समाज में अभी भी कई समूहों के लिए अवसरों की समानता सफल नहीं हुई है।2. वस्तुकरण की समस्या: रोहिणी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पिछड़े वर्ग के लिये केंद्र सरकार की नौकरियों में नियुक्तियों और केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश में पिछले पाँच वर्षों के आँकड़ों के आधार पर निष्कर्ष निकाला है कि केंद्रीय ओबीसी कोटा का 97% लाभ इस वर्ग की केवल 25% जातियों को प्राप्त होता है।
3. आँकड़ों की कमी: रोहिणी आयोग के आँकड़े केवल उन संस्थानों पर आधारित हैं जो केंद्र सरकार के दायरे में आते हैं। परंतु स्थानीय स्तरों पर विभिन्न समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर स्पष्ट आँकड़ो का अभाव है।
4. लाभ उठाने में असमर्थ: अभी भी जातियाँ आय के अधिक पारंपरिक स्रोतों से ही जुड़ी हुई हैं और अर्थव्यवस्था के खुलने से उत्पन्न हुए अवसरों का लाभ उठाने में असमर्थ हैं।
5. समान अवसर आयोग (2008): ने अल्पसंख्यक मामले मे मंत्रालय को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में कई सिफारिशें की थीं। परंतु इस संबंध में बहुत कम प्रगति हुई है। क्योंकि सरकारें हमेशा से ही राजनीतिक लाभ के दृष्टिकोण से आगे बढ़ी हैं।
6. हाशिये वर्गों की माँगें: आराक्षण के लाभ से वंचित रहे हाशिये वर्गों की ओर से माँग उठ रही है कि ऐसे विकल्पों पर विचार किया जाए जो आरक्षण की प्रणाली को पूरकता प्रदान कर सके।
7. आरक्षण का असमान वितरण: आरक्षण के असमान वितरण ने निम्न जाति समूहों के बीच एकजुटता को भी बाधित किया है।
सकारात्मक कार्रवाई की समस्याओ के समाधान
1. नये तंत्र की आवश्यकता: यह आवश्यक है कि सकारात्मक कार्रवाई के लाभ किसी भी जाति के निर्धनतम हिस्से तक पहुँचे। इसके लिए एक तंत्र की आवश्यकता है जो सकारात्मक कार्रवाई की कमी को दूर कर सके और माँगों के प्रति अधिक उत्तरदायी हो।2. संवेदनशील नीति की आवश्यकता: संवेदनशील नीति की आवश्यकता है, जिससे विशिष्ट समूहों की आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके।
3. संस्थागत व्यवस्था: संयुक्त राज्य अमेरिका या यूनाइटेड किंगडम के ‘समान अवसर आयोग’ जैसी संस्था के गठन की आवश्यकता है।
4. जाति-आधारित जनगणना: भारत में सकारात्मक कार्रवाई व्यवस्था में किसी भी सार्थक सुधार के लिये एक जाति-आधारित जनगणना आयोजित कराना आवश्यक है। क्योंकि जाति जनगणना को सामान्य जनगणना के साथ शामिल करना वर्तमान समय की माँग है।
5. मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति: पिछड़ों के लिये न्याय, समानता और दक्षता के बीच संतुलन बनाने के लिये एक मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का होना अनिवार्य है।
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1.What do you understand about protection based discrimination? Do you believe that protective discrimination violates the principle of fairness? Give reasons in support of your answer.
संरक्षणमूलक भेदभाव से आप क्या समझते हैं? क्या आप मानते हैं कि संरक्षणमूलक भेदभाव निष्पक्षता के सिद्धांत का हनन करता अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिये। OR/अथवा
2.Do you believe that protective discrimination has strengthened the principle of fairness? Give reasons in support of your answer.
क्या आप मानते हैं कि सरंक्षात्मक भेदभाव ने निष्पक्षता के सिद्धांत को मजबूत किया है ? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिये।
OR/अथवा
3.How does protective discrimination establish the principle of fairness? Please explain.
सुरक्षात्मक भेदभाव कैसे निष्पक्षता के सिद्धान्त को स्थापित करता है? व्याख्या कीजिये।
OR/अथवा
4.Do you agree that protective discrimination violates the principle of justice? support your argument. Give a reason.
क्या आप सहमत हैं कि संरक्षात्मक भेदवभाव न्याय के सिद्धांत की अवहेलना करता है ? अपने तर्क के समर्थन
में कारण दीजिए।
OR/अथवा
5.Does protective discrimination violate principles of fairness? Please comment.
क्या संरक्षणमूलक भेदभाव निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है? टिप्पणी कीजिये ।
OR/अथवा
6.Do you think that positive discrimination is against the rule of fairness? Discuss
क्या आपको लगता है कि सकारात्मक विभेद औचित्यता के नियम के विरुद्ध है ? विवेचन कीजिए
OR/अथवा
7.What do you understand about the principle of fairness in relation to 'protective discrimination'?
सुरक्षात्मक भेदभाव' के संबंध में न्यायोचित्य के सिद्धांत के बारे में आप क्या समझते हैं ?
OR/अथवा
8.What is meant by 'protective discrimination'? Does this violate the principle of fairness?
'सुरक्षात्मक भेदभाव' से क्या अभिप्राय है ? क्या यह न्यायोचित्य के सिद्धांत का उल्लंघन करता है?
OR/अथवा
9.Does the principle of protective discrimination violate the principle of fairness? Explain with suitable examples.
क्या सुरक्षात्मक भेदभाव का सिद्धांत निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है ? उचित उदाहरणों सहित व्याख्या कीजिए।
OR/अथवा
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