स्वतंत्रता (Liberty): नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Liberty) और सकारात्मक स्वतंत्रता (Positive Liberty), जे एस मिल, बर्लिन, लास्की, मैकफर्सन

स्वतंत्रता (Liberty): नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Liberty) और सकारात्मक स्वतंत्रता (Positive Liberty), जे एस मिल, बर्लिन, लास्की, मैकफर्सन

स्वतंत्रता (Liberty) का अर्थ

स्वतंत्रता शब्द का अर्थ है आजादी। जैसे बोलने की स्वतंत्रता, घूमने-फिरने की स्वतंत्रता, मनपसंद कार्य करने की स्वतंत्रता, किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता इत्यादि।

स्वतंत्रता (Liberty) शब्द लैटिन भाषा के “लिबर” शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है “अवरोधों से मुक्ति” या “प्रतिबंधों का अभाव”।


स्वतंत्रता (Liberty) की परिभाषा

1. हॉब्स के अनुसार:- बाहरी बाधाओं की अनुपस्थिति, जो बाधाएँ मनुष्य की किसी भी कार्य को करने की शक्ति को कम करती हैं।

2. सीले के अनुसार:- स्वतंत्रता अतिशासन का विलोम है

3. हेगेल के अनुसार:- स्वतंत्रता कानून का पालन होता है।

4. मैक्कीन के अनुसार:- स्वतंत्रता सभी प्रतिबंधों का अभाव नहीं बल्कि अतार्किक प्रतिबंधों का अभाव है

5. जे. एस. मिल के अनुसार:- स्वतंत्रता प्रतिबंधों का अभाव है क्योंकि हर प्रबंध दोष है और लोगों को नियंत्रित करने से बेहतर, उन्हें अपनी इच्छा पर छोड़ देना चाहिए (Essay on Liberty 1859)

6. लिओस्ट्रॉस के अनुसार:- प्रत्येक मानव का जीवन दूसरे मानव से संबंधित होता है इसलिए स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए प्रतिबंध आवश्यक है

7. लास्की के अनुसार:- स्वतंत्रता “प्रतिबंध की अनुपस्थिति” है जो व्यक्तिगत खुशी की एक गारंटी है।

8. जे. आर. ल्यूकस के अनुसार:- मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है इसलिए उसे स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए क्योंकि उसे सही और गलत का भाव होता है


स्वतंत्रता (Liberty) के प्रकार

1958 में 'यशायाह बर्लिन' ने अपनी पुस्तक "Two Concept of Liberty" में सबसे पहले स्वतंत्रता के दो प्रकारों का वर्णन किया था:-

नकारात्मक स्वतंत्रता:- नकारात्मक स्वतंत्रता का अर्थ है बाहरी बाधाओं की अनुपस्थिति। अंतः ऐसी स्वतंत्रता जिसमे कोई प्रतिबंध नहीं होता है तो उसे हम नकारात्मक स्वतंत्रता कहते है।

सकारात्मक स्वतंत्रता:- अगर व्यक्ति के पास किसी काम को करने की क्षमता या योग्यता है तो वह उस काम को स्वतंत्रत रूप से कर सकता है परंतु यही उस काम से किसी दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता है तो राज्य प्रतिबंध लगा सकता है इसे हम सकारात्मक स्वतंत्रता कहते है।


नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Liberty) 

नकारात्मक स्वतंत्रता का अर्थ है बाहरी बाधाओं की अनुपस्थिति। अंतः ऐसी स्वतंत्रता जिसमे कोई प्रतिबंध नहीं होता है तो उसे हम नकारात्मक स्वतंत्रता कहते है।

नकारात्मक स्वतंत्रता को बर्लिन, बेंथम, जॉन लॉक, जे एस मिल, हरबर्ट स्पेसर, मिल्टन फ्रीडमैन, एडम स्मिथ और नॉजिक समर्थन करते हैं


नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Liberty) पर जे एस मिल के विचार

जे एस मिल ने स्वतंत्रता के विचार का वर्णन अपनी पुस्तक ‘आन लिबर्टी’ (On Liberty) में किया है।:-

जे एस मिल मनुष्य के पूर्ण विकास के लिए स्वतंत्रता को आवश्यक मानते है। इसलिए वह अन्य शासन प्रणालियों की तरह प्रजातान्त्र (लोकतंत्र) में भी अंकुश लगाना चाहते है। क्योंकि उनका कहना है कि लोकतंत्र के आने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की जाएगी।

लोकतंत्र मे बहुसंख्यक अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता छीन सकते हैं इसलिए व्यक्ति की स्वतंत्रता को राज्यों के हस्तक्षेप से संरक्षित किया जाना चाहिए और व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता के लिए लोकतांत्रिक राज्य की बाधाओं से भी डरता है।

जे एस मिल के अनुसार शासन के कार्यों पर अंकुश लगाया जाए, ताकि व्यक्ति की स्वतन्त्रता बनी रहे। इसके लिए जे एस मिल ने स्वतंत्रता को दो भागों में बाँटा है:-

1. विचारों की स्वतंत्रता:- किसी भी व्यक्ति को, किसी भी हालत में उसके विचार व्यक्त करने से नहीं रोका जाना चाहिए। और किसी व्यक्ति को सनकी मानकर उनके विचारों को दबाया नहीं जाए, क्योंकि महान विचारक सनकी ही लगते हैं।

यदि सारा समाज कोई एक विचार रखता है और कोई एक व्यक्ति उसके विपरीत विचार रखता है, तो भी उस व्यक्ति को उसके विचार व्यक्त करने से ही नहीं रोका जाना चाहिए।

2. कार्यों की स्वतंत्रता:- जे एस मिल व्यक्ति को कार्य करने की स्वतंत्रता प्रदान करते है परंतु उसकी स्वतंत्रता को समाज के हित के लिए सीमित भी करते है।

व्यक्ति के वे कौन से कार्य हैं जिन पर कुछ रुकावट हो? और वे कौन से कार्य हैं जिन पर रुकावट न हो? इसके लिए जे एस मिल ने व्यक्ति के कार्यों को दो भागों में बाँटा है:-

> स्वयं संबंधित कार्य:- मनुष्य के निजी कार्य से अन्य व्यक्तियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह कार्य व्यक्ति के स्वयं तक ही सीमित रहते हैं। जैसे व्यक्ति क्या खाता है? क्या पहनता है? इसलिए मिल के अनुसार इन कार्यों में व्यक्ति को पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान करनी चाहिए।

> परसम्बन्धी कार्य:- व्यक्ति के वे कार्य जो समाज के अन्य व्यक्तियों को भी प्रभावित करते हैं परसम्बन्धी कार्य हैं। यदि व्यक्ति के इन कार्यों से समाज की कोई हानि न हो तो व्यक्ति पर कोई अंकुश नहीं होना चाहिए। किन्तु यदि व्यक्ति के इन कार्यों से समाज को हानि होती हो, तो राज्य उन कार्यों पर अंकुश लगा सकता है।


नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Liberty) पर बर्लिन के विचार

बर्लिन के अनुसार स्वतंत्रता वह है जिसमे एक व्यक्ति बिना किसी दूसरों के अवरोध के कार्य कर सकता है। वह कहते है आप में स्वतंत्रता का अभाव केवल तभी है जब आपको दूसरों के द्वारा एक लक्ष्य प्राप्त करने से रोका जाए।

उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई पुरुष या महिला स्वतंत्र है, लेकिन अपनी स्वतंत्रता का आनंद लेने में असमर्थ है, तो दोष स्वतंत्रता की अवधारणा में नहीं बल्कि पुरुष या महिला का है।

बर्लिन आगे बताते है कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र के बीच कोई तार्किक संबंध नहीं है क्योंकि एक तानाशाह द्वारा एक लोकतांत्रिक सरकार की तुलना में पुरुष और महिला को ज्यादा स्वतंत्र छोड़ा जा सकता है।

स्वतंत्रता तभी बनी रहती है ज़ब किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत (personal) मामलों में किसी भी तरह की बाधा या हस्तक्षेप का अभाव है।


नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Liberty) पर मिल्टन फ्रीडमैन के विचार

मिल्टन फ्रीडमैन ने भी अहस्तक्षेप की नीति को सही ठहराया था क्योकि वह मानते है कि व्यक्ति स्वयं इस बात को जनता है कि उसे क्या चाहिए? और सरकार का हस्तक्षेप जितना कम होगा व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने में उतना ज्यादा सक्षम होगा।

मिल्टन फ्रीडमैन व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मुक्त व्यापार, अहस्तक्षेप की नीति और राज्य न्यूनतम कार्य करें आदि बातों का समर्थन करते थे और मानते हैं कि राज्य का काम यह है कि राज्य नागरिकों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा प्रदान करें, बेरोजगारों मे सहायता करें एवं शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा उपलब्ध कराएं।

अंतः राज्य का काम केवल इतना है कि राज्य कानूनों का निर्माण करें ताकि जनता के जान-माल और स्वतंत्रता की रक्षा हो सके।


नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Liberty) के मूल सिद्धांत या मान्यताएं / महत्व / विशेषताए / प्रासंगिकता

1. स्वतंत्रता अवरोधों की अनुपस्थिति है।

2. एक व्यक्ति तर्कसंगत है और वह जानता है कि उसके लिए क्या उचित है। इसलिए व्यक्ति के विकास के लिए उसे कुछ स्वतंत्रताओं की आवश्यकता होती है।

3. प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत मामलों में स्वतंत्रता दी जानी चाहिए और समाज या राज्य को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

4. व्यक्तिगत हित और सामाजिक हित के बीच कोई संघर्ष नहीं है और अपने स्वयं के हितों की सेवा करके एक व्यक्ति भी सामाजिक हित में कार्य करता है।

5. समाज को प्रभावित करने वाले व्यक्ति के कार्यों को कानूनों के माध्यम से राज्य द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन राज्य का यह हस्तक्षेप न्यूनतम होना चाहिए।

6. राज्य के कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता को नहीं छीन सकते हैं, लेकिन यह सामाजिक कल्याण के लिए इसे नियंत्रित कर सकते हैं।

7. लोकतांत्रिक सरकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी नहीं देती है और अल्पसंख्यकों को कुचल सकती है।

8. नकारात्मक स्वतंत्रता में व्यक्ति को अधिक स्वतंत्रता मिलती है जिससे व्यक्ति का विकास तेज होता है और हर व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार काम करने का मौका मिलता है जिससे समाज में नए-नए आविष्कार होते हैं।

9. नकारात्मक स्वतंत्रता में हर व्यक्ति अपना विकास करता है जिसे समाज भी विकसित होता है क्योंकि नकारात्मक स्वतंत्रता में प्रत्येक व्यक्ति अधिक से अधिक संपत्ति हासिल करने की कोशिश करता है जिससे राष्ट्रीय आय में भी वृद्धि होती है।

10. जब कानून अधिक होते हैं तब व्यक्ति की स्वतंत्रता कम होती है इसलिए कानून कम से कम होने चाहिए और विचार, भाषण, धर्म और संपत्ति की स्वतंत्रता कभी भी प्रतिबंधित नहीं होनी चाहिए।


सकारात्मक स्वतंत्रता (Positive Liberty) 

19वीं शताब्दी के दौरान स्वतंत्रता की एक सकारात्मक अवधारणा विकसित हुई। हम इसे रूसो, कांट, हेगेल, टी. एच. ग्रीन, बॉस्कैन्ट, बार्कर और लास्की के लेखन में पा सकते हैं।

अगर व्यक्ति के पास किसी काम को करने की क्षमता या योग्यता है तो वह उस काम को स्वतंत्रत रूप से कर सकता है परंतु यही उस काम से किसी दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता है तो राज्य प्रतिबंध लगा सकता है इसे हम सकारात्मक स्वतंत्रता कहते है।


सकारात्मक स्वतंत्रता (Positive Liberty) पर टी. एच. ग्रीन के विचार

स्वतंत्रता एक बहुत अच्छी चीज है परंतु यदि स्वतंत्रता के नाम पर अनुचित (गलत) कामों को करने की छूट व्यक्ति को दे दी जाए, तो स्वतंत्रता और स्वेच्छाचार (इच्छा) में कोई अंतर नहीं होगा।

टी. एच. ग्रीन के अनुसार स्वतंत्रता का अर्थ प्रतिबंधों का अभाव नहीं है। बल्की असली स्वतंत्रता वह है, जो एक जिसमे वांछनीय कार्यों को करने की सुविधा न हो।

अगर किसी व्यक्ति को रोका न जाए तो वह हर तरह के काम करेगा, चाहे वह ग़ैरकानूनी क्यों न हो इसलिए हस्तक्षेप का अभाव नकारात्मक स्वतंत्रता होती है।

ग्रीन के अनुसार स्वतंत्रता उन कार्यों को करने का नाम है, जो करने योग्य हों और जिसका समाज में अन्य व्यक्तियों के साथ साझा उपयोग किया जा सके।

ग्रीन के अनुसार सभी बुराइयों को समाप्त करना चाहिए जो व्यक्ति की स्वतंत्रता तथा उसके विकास में बाधा डालती है । जैसे गरीबी, अशिक्षा और नशा करना।


सकारात्मक स्वतंत्रता (Positive Liberty) पर लास्की के विचार

1925 में लास्की ने अपनी पुस्तक “A Grammar of Politics” मे अपने स्वतंत्रता से संबंधित विचार का वर्णन किया था:-

लास्की के अनुसार स्वतंत्रता एक ऐसे वातावरण को बनाना है, जिसमें व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा अपना विकास करने के अवसर मिल सकें परंतु स्वतंत्रता ऐसी होनी चाहिए जिससे दूसरों की स्वतंत्रता को हानि न पहुंचे।

अधिकारों के बिना स्वतंत्रता नहीं हो सकती है परंतु हर प्रकार के कार्य करने का अधिकार हो तो उसको हम स्वतंत्रता का नाम नहीं दे सकते है बल्कि केवल ऐसे कार्य को करने के लिए अधिकार मिलना चाहिए जो व्यक्ति के खुद के विकास के लिए मददगार है।

मनुष्य और राज्य के बीच कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि यह दोनों ही एक-दूसरे के पूरक और सहयोगी हैं और जुआ खेलना, चोरी करना स्वतंत्रता नहीं है और ना ही व्यक्ति को इस तरह की स्वतंत्रता का अधिकार है

लास्की के अनुसार अधिकतर, अवसर और उत्तरदायी सरकार स्वतंत्रता के लिए आवश्यक है

लास्की ने तीन प्रकार की स्वतंत्रता का वर्णन किया है :-

1 निजी स्वतंत्रता:- यह व्यक्ति के निजी मुद्दों से संबंधित है

2 राजनीतिक स्वतंत्रता:- इसका मतलब राज्य के मामले में सक्रिय होने की शक्ति है

3 आर्थिक स्वतंत्रता:- यह व्यक्ति की रोजी-रोटी से संबंधित है इसको बनाए रखने के लिए उद्योगों में लोकतंत्र होना चाहिए


सकारात्मक स्वतंत्रता (Positive Liberty) पर मैकफर्सन के विचार

मैकफर्सन सकारात्मक स्वतंत्रता को 'विकास की स्वतंत्रता' कहते हैं। क्योंकि मैकफर्सन के अनुसार स्वतंत्रता का अर्थ है समाज के प्रत्येक सदस्य के लिए जीवन और श्रम की उपलब्धता हो।

मैकफर्सन ने स्वतंत्रता को 'रचना स्वतंत्रता' (Creative Freedoms) भी कहा है अंतः स्वतंत्रता के लिए उत्पादन के पूंजीवादी तरीके को किसी और प्रणाली में बदल देना चाहिए।

मैकफर्सन के अनुसार एक मानव को पूर्ण के रूप में कार्य करने और अपने विकास करने की शक्ति ही स्वतंत्रता है।

मैकफर्सन ने बर्लिन के स्वतंत्रता सिद्धांत की आलोचना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता की उदारवादी अवधारणा ने स्वतंत्रता के महत्व को ही खत्म कर दिया है।


सकारात्मक स्वतंत्रता (Positive Liberty) के मूल सिद्धांत या मान्यताएं / महत्व / विशेषताए / प्रासंगिकता

1. स्वतंत्रता प्रतिबंधों की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह उन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों की उपस्थिति है जिनके बिना इसे महसूस नहीं किया जा सकता है।

2. स्वतंत्रता का उद्देश्य मनुष्य का विकास करना है।

3. उचित अवसरों और सामाजिक परिस्थितियों के बिना स्वतंत्रता को महसूस नहीं किया जा सकता है।

4. स्वतंत्रता के लिए अधिकार आवश्यक हैं

5. किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता सामाजिक कल्याण के अनुरूप होनी चाहिए।

6. राज्य का कर्तव्य स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए सकारात्मक परिस्थितियों का निर्माण करना है और इसके लिए राज्य कुछ व्यक्तियों की स्वतंत्रता को सीमित कर सकता है।

7. स्वतंत्रता सामाजिक मनुष्य की सामाजिक आवश्यकता है और यह असामाजिक प्राणियों को नहीं दी जाती है।

8. केवल एक कल्याणकारी राज्य के द्वारा ही सकारात्मक स्वतंत्रता को महसूस किया जा सकता है।


नकारात्मक स्वतंत्रता और सकारात्मक स्वतंत्रता की तुलना

नकारात्मक स्वतंत्रता और सकारात्मक स्वतंत्रता की तुलना


Related Questions

1.Critically analyze the positive and negative concepts of liberty given by Berlin.
बर्लिन द्वारा दी गई स्वतंत्रता की सकारात्मक एवं नकारात्मक अवधारणाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

OR/अथवा

2.Examine the negative and positive concepts of liberty.
स्वतंत्रता की नकारात्मक और सकारात्मक अवधारणाओं का परीक्षण कीजिए ।

OR/अथवा

3.Discuss Berlin's concepts of negative and positive liberty.
बर्लिन की नकारात्मक और सकारात्मक स्वतंत्रता की अवधारणाओं की चर्चा कीजिये।

OR/अथवा

4.Define liberty. In the development of the concept of liberty, J. S. Analyze Mill Cray's contribution.
स्वतंत्रता को परिभाषित कीजिये। स्वंत्रता की संकल्पना के विकास में जे. एस. मिल क्रे योगदान का विश्लेषण" कीजिये।

OR/अथवा

5.Discuss the two concepts of Berlin's liberty..
बर्लिन की स्वतंत्रता की दो अवधारणाओं की विवेचना कीजिए|

OR/अथवा

6.Explain the difference between negative and positive liberty.
नकारात्मक और सकारात्मक स्वतंत्रता के बीच अंतर स्पष्ट कीजिये।

OR/अथवा

7.Explain with examples the two concepts of liberty discussed by Isaiah Berlin.
आईजिया बर्लिन द्वारा विवेचित स्वतंत्रता की दो संकल्पनाओं की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिये।


Full Explanation Video On Youtube (Shrivastav Classes)


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.